कुंडली में शुक्र की स्थिति का करियर पर प्रभाव :-

ज्योतिष में शुक्र ग्रह सौरमंडल का सबसे दैदीप्यमान ग्रह है। यह वृष तथा तुला राशि का स्वामी है तथा तुला राशि में स्थित होने पर विशेष बली रहता है और मीन राशि में उच्च व कन्या राशि में नीच का होता है। शुक्र को पति-पत्नी, प्रेम संबंध, ऐश्वर्य, आनंद आदि का भी कारक ग्रह माना गया है। इसके साथ-साथ किसी भी इंसान के करियर को आकार देने में भी शुक्र का बहुत महत्वपूर्ण योगदान होता है ।।

अगर कुंडली में शुक्र की स्थिति अच्छी है तो जातक का पूरा जीवन भोग, आनंद और ऐश्वर्य के साथ बितता है। शुक्र ग्रह से प्रभावित व्यक्ति सौम्य एवं अत्यंत सुंदर व्यक्तित्व का होता है। शुक्र के विशेष प्रभाव से जातक जीवनभर सुखी रहता है। शुक्र अपने प्रभाव से जातक को मकान और वाहन आदि का भी सुख देता है। सम्पूर्ण भोग विलास की चीजों का क्षेत्राधिकार ग्रहों में शुक्र ग्रह को प्राप्त हैं। शुक्र की चमक एवं शान अन्य ग्रहों से अलग व निराली है। शुक्र की आराधना कर शुक्र को बलवान बनाकर सुख व ऐश्वर्य पाया जा सकता है। शुक्र ग्रह से प्रभावित युवतियाँ सौन्दर्य प्रतियोगिताओं में जीत दर्ज करती हैं। कुछ ग्रह ऐसे भी होते हैं, जो कुछ दूर तक तो युवतियों का सहयोग करते हैं, लेकिन जैसे ही दूसरे प्रतिभागियों के ग्रह भारी पड़ते हैं, कमजोर ग्रह वाली युवतियां पिछड़ने लगती है। ऐसे में शुक्र ग्रह बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

आइए अब जानते हैं कि किसी भी व्यक्ति की कुंडली में विभिन्न भावों में शुक्र की उपस्थिति किस प्रकार से उसके कार्य क्षेत्र को प्रभावित करने की क्षमता रखती है।।

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प्रथम भाव में शुक्र का फल
पहले भाव में स्थित शुक्र जातक को कला का शौकीन, संगीत, नृत्‍य और चित्रकला में रूचिपूर्ण कार्य करवाता है और हमेशा राजकार्य में कुछ न कुछ गतिविधि बनाये रखता है। सामान्‍य तौर पर प्रथम भाव में शुक्र भाग्‍य को अच्‍छा बनाता है और अपने जीवन को सुखमय व्यतीत करता है ।

दूसरे भाव में शुक्र का फल
दूसरे भाव में स्थित शुक्र ग्रह जातक को अधिक धन की प्राप्ति करवाता है। जातक को समृद्ध व जीवनसाथी के साथ व्यापार के लिए प्रेरित करवाता है। जातक दिखने में सुंदर व विलासिता से भरा जीवन बिताते हैं। जातक भव्‍य और सुंदर चीजों, मिष्ठान्न, लोकप्रिय, जौहरी, मिट्टी के सामान से जुड़ा व्यवसाय, कृषि, पशु, कविता पाठ, आदि से जुड़ा हुआ कार्य करवाता है ।

तीसरे भाव में शुक्र का फल
जन्म कुंडली के तीसरे भाव में शुक्र ग्रह स्थित हो तो ऐसा जातक कृपण, आलसी, चित्रकार, विद्वान तथा यात्रा करने का शौकीन होता है। आध्यात्मिक कर्मों के संचय को भी दर्शाता है व विदेश से जुड़े कारोबार को करता है। साथ ही, ऐसा जातक सोशल मीडिया, मनोरंजन, ऑनलाइन, अन्य उपकरण का व्यापार व कार्य करता है।

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चतुर्थ भाव में शुक्र का फल
जन्म कुंडली के चतुर्थ भाव में शुक्र ग्रह स्थित हो तो ऐसा जातक निजी जीवन या अफेयर को दर्शाता है। साथ ही जातक छोटे भाई-बहनों से जुड़ कर विदेशी व्यापार को करता है। मीडिया, वस्त्र, फर्नीचर, घर के अंदर की कलात्मक वस्तुएँ, कार, ऑर्किटेक्चर, जमीन, वाहन, घोड़ा, झील, नदी, समुद्र, नाला, तालाब, आदि से सम्बन्धित नौकरी अथवा व्यापार करता है।शादीशुदा जातक अपने बच्चों के भविष्य के बारे में जानना चाहते हैं ।

पंचमभाव में शुक्र का फल 

जन्म कुंडली के पंचम भाव में शुक्र ग्रह स्थित हो तो ऐसा जातक सामाजिक झुकाव का प्रतिनिधित्व करता है या एक अच्छा राज नेता बनता है। ऐसा जातक कलात्मक कार्यों, नाटक, मनोरंजन, हॉल और पार्टी, रोमांस, प्यार, प्रेम प्रसंग, सिनेमा, मनोरंजन से जुड़ा कार्य और भौतिक सुखों जैसे-खेल, ओपेरा, ड्रामा, संगीत, नृत्य, शेयर बाजार, जुआ, मैच फिक्सिंग और लॉटरी से जुड़ा कार्य करता है।

छठा भाव में शुक्र का फल
जन्म कुंडली के छठा भाव में शुक्र ग्रह स्थित हो तो ऐसा जातक राजनीति, न्यायपालिका की कार्यवाही, देश में सांप्रदायिक सौहार्द्र और श्रमिक संस्थाओं व राष्ट्र रक्षा एवं सेना से जुड़ा कार्य करता है। ऐसा जातक स्वास्थ्य, मेडिकल सेवाएँ और स्वास्थ्य कार्यकर्ता जैसे- नर्सिंग, दंत चिकित्सक और डॉक्टरी से जुड़ा हुआ कार्य करता है।

सप्तम भाव में शुक्र का फल
जन्म कुंडली के सप्तम भाव में शुक्र ग्रह स्थित हो तो ऐसा जातक यदि किसी आध्यात्मिक जीवन से जुड़ा हुआ कार्य करता है। क्रिएटिविटी, ननिहाल पक्ष से जुड़ कर कार्य करता है। संपत्ति या ज़मीन जायदाद से जुड़ा हुआ व्यापार भी ऐसे जातकों को कामयाब बशाता है।

अष्टम भाव में शुक्र का फल
जन्म कुंडली के अष्टम भाव में शुक्र ग्रह स्थित हो तो ऐसा जातक दीर्घजीवी व कटुभाषी होता है। इसके ऊपर कर्जा चढ़ा रहता है। ऐसा जातक खदान, कोयला, सट्टा व्यापार, लॉटरी, मंत्र, तंत्र, एवं आध्यात्मिक वस्तुओं से जुड़ा हुआ व्यापार व नौकरी करता है ।

नवम भाव में शुक्र का फल
जन्म कुंडली के नवम भाव में शुक्र ग्रह स्थित हो तो ऐसा जातक धर्मादि कार्यों जुड़ा कार्य, राजकीय सेवा व खेल कूद से जुड़े हुए कार्य से अपने जीवन में आजीविका को प्राप्त करता है और अपने जीवन को सुखमय तरीके से व्यतीत करता है।

दशम भाव में शुक्र का फल
जन्म कुंडली के दशम भाव में शुक्र ग्रह स्थित हो तो ऐसा जातक व्यापार, समृद्धि, सरकार से सम्मान, अधिकारी पद, घुड़सवारी, एथलेटिक्स, समाज सेवा, कृषि, ताकतवर कार्यों, शिक्षण, आदेशात्मक कामों, आदि चीज़ों से जुड़ा कार्य करता है।

एकादश भाव में शुक्र का फल
इस भाव में शुक्र ग्रह हो तो ऐसा जातक रत्नों व सफेद वस्तुओं से जुड़ा हुआ कार्य करता है व साथ ही ज्ञान देने वाला, शेयर बाज़ार, संगीत,फिल्मों व वाहन से जुड़ा हुआ कार्य करता है ,अपने मित्रों के साथ जुड़ कर सामाजिक मदद करने वाला होता है व उससे अपने जीवन की आजीविका को प्राप्त करता है और अपने जीवन को सुखमय बना कर जीता है

द्वादश भाव में शुक्र का फल
जन्म कुंडली के द्वादश भाव में शुक्र ग्रह स्थित हो तो ऐसा जातक परोपकार, धर्मार्थ या सुधारक संस्थान, जेल, शरण और अस्पताल आदि से जुड़ा होता है। इस भाव में बैठे शुक्र ग्रह के जातक अपराधियों, जासूसों, गुप्त बलों और गुप्त दुश्मनों, भूमिगत जैसे कार्य व मंत्रालय से जुड़ा कार्य करते हैं।

इस प्रकार कुंडली के विभिन्न भावों में स्थित होकर शुक्र ग्रह आपके कार्यक्षेत्र को अलग-अलग रूपों में परिभाषित करता है। उपरोक्त दिए हुए फल केवल सामान्य प्रकृति के हैं। व्यक्तिगत विश्लेषण व्यक्ति विशेष की कुंडली पर आधारित होता है तथा देश, काल और पात्र के सिद्धांत के आधार पर भिन्न हो सकता है।

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